Seizure of Money Drugs Alcohol- and Gold

चुनाव पूरे होते ही बल्कि होने से पहले ही एग्ज़िट पोल का खेल शुरू हो गया है। लेकिन इस शोर-गुल के बीच चुनावी प्रक्रिया में काले धन के प्रयोगों पर कोई नहीं बोल रहा। गुजरात हो, दिल्ली हो, तमिलनाडु हो, पंजाब हो या बंगाल - हर राज्य में शराब, ड्रग्स, नकदी, सोना-चाँदी जम कर बँटा भी और सीज़ भी किया गया। लगभग 3447.74 करोड़ रुपयों की वैल्यू के ड्रग्स, अल्कोहल, मैटल औऱ कैश सीज़ किया गया है।
भाजपा शासित राज्य शराब सीज़ किए जाने के मामले में अव्वल
बात करते हैं शराब की, पूरे देश में 184.34 लाख लीटर शराब सीज़ की गई जिसकी कुल कीमत 293.60 करोड़ रुपये थे। 41.64 लाख लीटर शराब के साथ महाराष्ट्र पहले स्थान पर रहा।मात्रा की दृष्टि से 16.57 लाख लीटर और 16.3 लाख लीटर के साथ उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर है। अगर कीमत की बात की जाए तो 45.48 करोड़ रुपयों के शराब के साथ उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर रहा। बिहार जहाँ शराब बंद है, वहाँ 1.19 लाख लीटर शराब ज़ब्त की गई।
ड्रग्स के मामले में पंजाब से आगे गुजरात और दिल्ली
बात ड्रग्स की हो तो इन चुनावों में कुल 76521.09 किलो ड्रग्स जब्त की गई। जब्त किए गए ड्रग्स की कीमत 1269.63 करोड़ रुपये थे। मात्रा के हिसाब से उत्तर प्रदेश पहले, मध्य प्रदेश दूसरे और महाराष्ट्र तीसरे पर है। उत्तर प्रदेश से 24378 कि. ग्राम, मध्य प्रदेश से 20558 कि. ग्राम और महाराष्ट्र से 15423 कि. ग्राम ड्रग्स ज़ब्त की गई। वहीं अगर लागत की बात करें तो गुजरात, दिल्ली और पंजाब, 524.34 करोड़, 374.67 करोड़ औऱ 218.49 के साथ पहले, दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं।
दक्षिणी भारत के राज्यों में सोना-चाँदी और अन्य मैटल का जोर
709.63 करोड़ की लागत के 3113 कि ग्राम सोना चांदी और अन्य मैटल के साथ तमिलनाडु कीमत और मात्रा - दोनों दृष्टि से पूरे देश में अव्वल है। कीमत की दृष्टि से उत्तर प्रदेश दूसरे और महाराष्ट्र कम मार्ज़िन से तीसरे स्थान पर है। मात्रा के हिसाब से कमलनाथ के मध्य प्रदेश और अमरिंदर सिंह के पंजाब ने बाज़ी मारी है।
नकदी के मामले में भी दक्षिणी भारत के राज्य अव्वल
नकदी भी काफी मात्रा में जब्त की गई है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना लगभग 227 करोड़, 139 करोड़ और 71 करोड़ की लागत के साथ पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर है।
जब्त किए गए इन 3447.74 करोड़ क्या बैंकों से आए हैं। क्या काग़ज़ों में एंट्रीज़ होंगी इन पैसों की। क्या प्रॉपर टैक्स दिया गया होगा? नहीं। मतलब ये वही काला धन है, जिसे नोटबंदी में खत्म कर दिया गया था। लोगों को बैंकों की लाइनों में महीनों तक खड़ा कर देने के बावजूद ये किसी मकसद में पास नहीं हुआ।
गरीबी मिटा देने के वादे करने वाली बीजेपी या न्याय का वादा कर देने वाली कांग्रेस या कोई और भी पार्टी न तो गरीबों से सहानुभूति रखती है न ही उनके ग़मों का इलाज करने की योजना। अगर ये कुछ रखती है तो बसे उन्हें खरीदने की ताकत।
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