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Criminal made Minister Kailash Chaudhary - First Conductor, then History Sheeter and now Minister

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Mamata banerjee Jai Shri Ram - राम का नाम लेने पर भड़की दीदी | राजनीति मे...

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Kya Arun Jaitley ki maut ko chupa rhe Narendra Modi | SwearningIn Ceremony | Cabinet 2019

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Payal Tadvi Suicide - क्या केवल तीन सीनियर डॉक्टर हैं जिम्मेदार? मनुवाद...

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Seizure of Money Drugs Alcohol- and Gold

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चुनाव पूरे होते ही बल्कि होने से पहले ही  एग्ज़िट पोल का खेल  शुरू हो गया है। लेकिन इस शोर-गुल के बीच चुनावी प्रक्रिया में काले धन के प्रयोगों पर कोई नहीं बोल रहा। गुजरात हो, दिल्ली हो, तमिलनाडु हो, पंजाब हो या बंगाल - हर राज्य में शराब, ड्रग्स, नकदी, सोना-चाँदी जम कर बँटा भी और सीज़ भी किया गया। लगभग 3447.74 करोड़ रुपयों की वैल्यू के ड्रग्स, अल्कोहल, मैटल औऱ कैश सीज़ किया गया है।  भाजपा शासित राज्य शराब सीज़ किए जाने के मामले में अव्वल बात करते हैं शराब की, पूरे देश में 184.34 लाख लीटर शराब सीज़ की गई जिसकी कुल कीमत 293.60 करोड़ रुपये थे। 41.64 लाख लीटर शराब के साथ महाराष्ट्र पहले स्थान पर रहा।मात्रा की दृष्टि से 16.57 लाख लीटर और 16.3 लाख लीटर के साथ उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर है। अगर कीमत की बात की जाए तो 45.48 करोड़ रुपयों के शराब के साथ उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर रहा। बिहार जहाँ शराब बंद है, वहाँ 1.19 लाख लीटर शराब ज़ब्त की गई।  ड्रग्स के मामले में पंजाब से आगे गुजरात और दिल्ली बात ड्रग्स की हो तो इन चुनावों में कुल...

BJP ki ek Tarfa Jeet RLD ko le Dubi

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इस पार्टी के संस्थापक कभी देश के प्रधानमंत्री पद पर रहे। किसानों के बड़े नेता के तौर पर उभरे। एक दौर ऐसा भी आया कि इनके बिना हस्तक्षेप के केंद्र में सरकार बननी मुश्किल हो गयी थी। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री रहे, उपप्रधानमंत्री का पद सम्भालते हुए प्रधानमंत्री बने चौधरी चरण सिंह, सिर्फ एक नाम, एक राजनीतिज्ञ, एक किसान नेता नही बल्कि विचारधारा के तौर पर उभरे। लेकिन उनके राजनीतिक विरासत को उनके बेटे आगे ले जाने में नाकाम रहे। आज इस चुनावी नतीजे को देखते हुए साफ कहा जा सकता है कि ये वो दौर है जब राष्ट्रीय लोक दल विलुप्त होने के कगार पर है। रालोद की स्थिति थी कि ओहले 2 संसद थे, फिर 2014 में अजित और जयंत भी चुनाव हार गए। 2019 के बंटवारे में गठबंधन में जगह मिली और बहित जूझने के बाद स्थानीय पार्टी सपा-बसपा ने रालोद को सिर्फ 2 सीटें दी।2 सीट जीवित रहने के लिए मिल तो गयी लेकिन फिर भी अजीत सिंह और जयंत सिंह अपनी साख नहीं बचा पाए और इसी तरह रालोद जैसी पार्टी का अंत नजर आ रहा है. source link